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UNDERSTANDING SANATAN DHARM

the path towards superior intelligence

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WHY IT IS IMPORTANT TO UNDERSTAND SANATAN DHARM ? 

सनातन धर्म को समझना क्युँ आवश्यक है?

 

Living on this Earth each and every individual is constantly engaged in making efforts and working towards leading a happier life. Whether a person's goal is creating wealth, whether a person wants to make a mark in a particular field, whatever effort a person is making he is working towards making his life happier.

Just like living in any country, we can live there happily if we are aware of the laws governing that country and if we follow them properly. Similarly living on this Earth it is very important to understand the laws which are governing the life on Earth. It is equally important that after understanding those laws we also follow those laws. Then and only then we can lead a happy life on Earth. 

इस पृथ्वि पर हर एक व्यक्ति सुखी जीवन व्यतीत करने के लिये प्रयासरत है। चाहे वह व्यक्ति धन उपार्जित करने का प्रयास कर रहा हो अथवा किसी विशेष क्षेत्र मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा हो, चाहे जो भी प्रयास हो हर व्यक्ति उच्चतर सुखी जीवन की ओर ही प्रयासरत है।

जिस प्रकार विश्व मे किसी भी देश मे सुख पूर्वक रहने के लिये उस देश के नियमों का जानना तथा उन नियमो का पालन करना आवश्यक है उसी प्रकार इस पृथ्वि पर सुख पूर्वक रहने के लिये हमे उन नियमों का जानना आवश्यक है जिन नियमों के आधार पर पृथ्वि पर जीवन व्याप्त है। उन नियमों को केवल जानना ही नहीं अपितु उनका पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। तब ही पृथ्वि पर सुख पूर्वक जीवन यापन संभव है।

It is Sanatan Dharm which has defined those laws which govern the life on Earth. Sanatan Dharm goes further and defines the exact path on which if we move and follow, it is certain that we can lead a rich and fulfilled life on Earth. This path is also completely scientific and completely logical. These laws are the tenets of Self realization presented in Part I of the books.

केवल सनातन धर्म मे ही वे समस्त नियम बताये गये हैं जो कि पृथ्वि पर जीवन का संचालन करते हैं। इस के अतिरिक्त सनातन धर्म वह मार्ग भी दर्शाता है जिस पर यदि चला जाय तो निश्चय ही पृथ्वि पर सुखी जीवन यापन किया जा सकता है। यह मार्ग पूर्णतया वैज्ञानिक भी है व तार्किक भी। यह नियम ही आत्मज्ञान के सिद्धांत हैं व पुस्तकों के प्रथम भाग मे प्रदर्शित हैं।

The promoter of this website has been studying ancient Indian texts for the last 43 years. According to his study and conclusion Sanatan Dharm is something entirely different from how it is practiced today by the masses in India and abroad. The people, especially in India, have today completely and entirely deviated away from the real path. Over the last many centuries the primary tenets have been completely forgotten or are not being followed and given the due importance. Especially in the glamour of the western materialistic thought and culture, people have discarded their own heritage and are blindly following a path which will lead them to no where.

पिछले लगभग ४३ वर्षों से इस वेबसाईट के वर्धक प्राचीन भारतीय ग्रंथो का अध्ययन कर रहे हैं। उन के अध्ययन व अनुभव के अनुसार वास्तविक सनातन धर्म वर्तमान मे जन मानस मे प्रचलित पद्धतियों से पूर्णतया भिन्न है। भारतीय जन मानस वास्तविक सनातन धर्म के मार्ग से पूर्णतया भटक चुका है। पिछले कुछ सैकड़ों वर्षो मे सनातन धर्म के मूल तत्वों को पूर्णतया भुला दिया गया है, अथवा उनका अनुसरण नही़ हो रहा है तथा सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का महत्व भी भुला दिया गया है। विशेषकर पाश्चात्य सोच व सभ्यता की चकाचौंध मे जन मानस अपनी पैतृक सम्पदा छोड़ कर उस अंधे मार्ग का अनुसरण  कर रहे हैं जो उन्हे किसी लक्ष्य पर नहीं पहुंचायगा।

Further, according to the research done by him it is his conclusion that the practices of Sanatan Dharm in real life aim at developing the intelligence and wisdom of a person culminating to the point of highest of the intelligence, the Supreme Intelligence. If we go into the depths of Sanatan Dharm we will understand that it is also completely scientific and logical. Sanatan Dharm looks illogical and unreasonable and unscientific because we today are unaware of the real knowledge and today it is being followed without its basic understanding.

लेखक के शोध कार्य के अनुसार वास्तव मे सनातन धर्म का मूल उद्देश्य व्यक्ति की बुद्धिमता तथा विवेक का विकास करना है, जिसका शीर्ष लक्ष्य उच्चतम बुद्धिमता की प्राप्ति व व्यक्ति को एक मानसिक व शारीरिक श्रेष्ठ स्तर पर पहुंचाना है। यदि हम सनातन धर्म की गहराईयों का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे तो समझेंगे कि सनातन धर्म पूर्णतया वैज्ञानिक व तार्किक है। वर्तमान मे सनातन धर्म अवैज्ञानिक व अतार्किक इस कारण लगता है क्युंकि वर्तमान समाज सनातन धर्म के वास्तविक ज्ञान से अनभिज्ञ हो चुका है व सनातन धर्म का अनुसरण बिना सोचे समझे कर रहा है।

 In this context the readers may note that the present day modern science has still not been able to define the laws which govern the existence of life on Earth. It is still in the process of search and discovery and may even take thousands of years to discover those laws, if at all.

इस संदर्भ मे पाठक गण यह जाने कि जब कि सनातन धर्म  के ग्रंथों मे पृथ्वि पर जीवन के मूल सिद्धांतों का व्यापक विवरण उपस्थित है, आधुनिक विज्ञान आज तक पृथ्वि पर जीवन के सिद्धांत नहीं जान पाया है। आधुनिक विज्ञान वर्तमान मे भी अभी शोध कार्य मे व्यस्त है व उसे  उन मूल सिद्धांतों की खोज मे संभवत सहस्त्रों वर्षो का समय लग सकता है यदि ऐसा हुआ तो।

Promoter's entire findings and research of the last 43 years has been condensed into the book "Understanding Sanatan Dharma" in English language and its Hindi translation " सनातन धर्म एक पुनः विचार" in Hindi language. It is his endeavor to bring to the masses the crux of Sanatan Dharm and Hindu heritage, and bring to the people the real understanding of their own religion which is for the betterment of their lives. All explanations and deductions are supported by scientific evidences, analysis and reasoning. This research is also aimed at ridding the Indian masses of the blind faith and bring in scientific reasoning and logic in Sanatan Dharma.

लेखक के  सनातन धर्म पर पिछले ४३ वर्षों के समस्त शोध व खोज कार्य जन मानस के हित हेतु दो पुस्तकों - " Understanding Sanatan Dharma" अंग्रेज़ी भाषा मे तथा इस का हिंदी अनुवाद  "सनातन धर्म एक पुनः विचार"  मे प्रस्तुत किया गया है। लेखक का यह प्रयास है कि जन मानस को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों से पुनः परिचित कराया जाय जिस से कि जन मानस अपने धर्म सनातन धर्म को समझे व अपने को जीवन के उच्चतम शिखरों तक ले जाने मे सक्षम हो। समस्त विवरण व निष्कर्श वैज्ञानिक प्रमाण व विश्लेषण के आधार पर हैं  व तर्क संगत हैं। यह शोध कार्य जन मानस मे अंध विश्वास को दूर करने व सनातन धर्म को वैज्ञानिक विश्लेषण युक्त व तर्क संगत बनाने हेतु भी है।

 

 

 

ABOUT THE AUTHOR

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N.K.Tawakley has been a science student and an Engineering professional holding B. E. (Hons.) degree in Electrical & Electronics Engineering, he also holds a Diploma in Business Management. With an aptitude for spiritual understanding N. K. Tawakley has focused his research upon the crux of philosophy of Sanatan Dharma in relation to and with the background of the modern science and technology. His bent towards study of spiritual subjects started in 1973 immediately after high school. Since then he has been collecting and studying ancient Indian texts. His reading has included the Puranas, Vedas, Upnishads, Tantra texts, The Ramayana and Srimad Bhagwad Gita, Manusmriti etc. 

On the professional front he is into the business of manufacturing LED lighting, Lighting Poles and Edison bulb lighting fixtures. He is also trading in different type of machinery related to printing & packaging and smart cards.

N.K.Tawakley has also forayed into fine arts with many awards in sketching, composition, oil painting etc. to his credit. 

He has also held the post of President in few social organizations and conducted social programs.

एन०के०तवाक्ले विज्ञान के छात्र रहे हैं तथा तकनीकि व्यवसाई हैं व विद्युत व आण्विकि मे बी०ई०(औनर्स) की डिग्री प्राप्त हैं, व बिज़नस मैनेजमेंट मे डिपलोमा प्राप्त हैं।आध्यात्मिक ज्ञान की ओर इनका झुकाव व प्राकृतिक रुचि रही है व इन्होने अपना शोध कार्य सनातन धर्म के मूल तत्वों की खोज पर केन्द्रित किया है वह भी आधुनिक विज्ञान व तकनीकि की पृष्टभूमि व संदर्भ मे। सन १९७३ से उच्च विद्यालय शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात ही इन्होने आध्यात्मिक विषयों का अध्ययन प्रारम्भ किया। तब से ये प्राचीन भारतीय ग्रंथो का संकलन, अध्ययन कर रहे हैं तथा सनातन धर्म के सिद्धांतों पर शोध कार्य स्वयं के जीवन पर कर रहे हैं। इन्होने पुराणो, वेदो, उपनिषदो, तंत्र, रामायण, श्रीमद्भागवद्गीता, मनुस्मृति इत्यादि लगभग २०० ग्रंथों का संकलन व अध्ययन किया है। 

व्यवसाय मे यह एल०ई०डी० लाईटिंग, लाईटिंग पोल, एडिसन बल्ब लाईटिंग फिक्सचर्स के प्रौद्योगिकी मे हैं। ये प्रिंटिंग व पैकेजिंग सम्बंधित मशीनरी तथा स्मार्ट कार्ड मशीनरी के व्यवसाय मे भी हैं।

एन०के०तवाक्ले की रुचि ललित कला मे भी रही है व इन्होने कई पुरस्कार भी जीते हैं।

एन०के०तवाक्ले कुछ शीर्श समाज सेवीसंस्थानो के अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं व अनेकों समाज सेवी कार्यक्रमों का संचालन भी किया है।

 

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