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Understanding Sanatan Dharma

UMA KAILASH FOUNDATION

 

RECENT ADVANCED SCIENTIFIC RESEARCH FINDINGS

Latest scientific research during the past few years has confirmed that the basic tenets which form the pillars of Sanatan Dharma are true. Some of these research findings are like this.

पिछले कुछ वर्षों मे हुये भौतिक वैज्ञानिक शोधों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि सनातन धर्म के मूल सिद्धांत जो कि सनातन धर्म के स्तंभ भी हैं, अक्षरक्ष सत्य हैं। इन में से कुछ शोधों के परिणाम इस प्रकार हैं:

1

That there is a field present connecting everything in this universe. This field is present in those spaces also where there is complete vacuum. This field connects everything in this universe with everything else. This confirms the existence of all pervading BRAHM as profusely described in our ancient Indian texts.

यह कि यह समस्त ब्रह्मांड एक शक्ति के स्तोत्र से व्याप्त है जो कि इस ब्रह्मांड की समस्त वस्तुओं तथा जीवों के मध्य संपर्क स्थापित करता है। अनेकों भारतीय प्राचीन ग्रंथो मे इस तथ्य का उल्लेख किया गया है व इसे ब्रह्म कहा गया है। यह शोध ब्रह्म के होने को प्रमाणित करता है।

https://home.cern/science/physics/higgs-boson

https://home.cern/science/physics/standard-model

The Real Building Blocks of the Universe (Royal Institute)

https://www.google.com/search?q=the+real+building+blocks+of+the+universe&oq=the+real+building+block&aqs=chrome.1.69i57j0i13i30j0i390j69i64.11165j0j15&sourceid=chrome&ie=UTF-8

2

That humans have NOT ‘evolved’ from monkeys. This confirms that if the human species has not evolved from random chemical reactions then someone has definitely created human beings or existence of God is indirectly confirmed.

यह कि मानव की उत्पत्ति वानर जाति से नहीं हुई है, अपितु जैसा मानव आज है वैसा ही आरम्भ से उत्पन्न हुआ है। मानव शरीर आकस्मिक रसायनों के संयोग से नहीं उत्पन्न हुआ है। किसी ने अवश्य ही मानव शरीर बनाया है। यह शोध प्रमाणित करता है कि एक अन्य शक्ति का आस्तित्व है जिस ने मानव व अन्य जीवों की उत्पत्ति की है। इस शक्ति को सनातन ध्रम में भगवान कहा गया है।

https://www.irishtimes.com/opinion/evidence-does-not-support-the-theory-of-evolution-1.318354

MUST WATCH YOUTUBE VIDEOS

https://www.youtube.com/watch?v=rXD5iGJS4x8

https://www.youtube.com/watch?v=7I8WwG9qZ1k

3

That human brain works like an ‘antenna’ to send and receive information. This confirms that humans can connect with the ’BRAHM’, the field which is connecting everything in this universe. This also confirms that it is possible to coonect with the God almighty through the medium of BRAHM.

यह कि मानव मस्तिष्क एक एंटीना के समान कार्य करता है। यह प्रमाणित करता है कि मानव मस्तिष्क संकेत व संदेश भेज भी सकता है तथा प्राप्त भी कर सकता है। तो इस से यह भी सिद्ध होता है कि मानव मस्तिश्क ब्रह्म के माध्यम से भगवान से सम्पर्क स्थापित कर सकता है।

That memory does not reside in human brain, but in the field surrounding or ‘BRAHM’. This confirms that possibly if we only remove the ‘dust’ of ‘ignorance’ from our minds and intellect we can receive all the knowledge stored in the ‘BRAHM’. This has been said time and again in our vedas and ancient texts. This also indicates that whatever research or creative work a person is doing its entire information gets stored in the BRAHM.

यह कि मानव की स्मरण शक्ति मस्तिष्क में नहीं अपितु उस व्यापक शक्ति स्तोत्र ब्रह्म मे है जिसने कि इस ब्रह्मांड को व्याप्त किया हुआ है। यह शोध प्रमाणित करता है कि यदि हम अज्ञान की वह धूल जिस ने हमारे मस्तिष्क को ढका हुआ है, उसे हटा दें तो कोई भी मनुष्य उस विशाल ज्ञान स्तोत्र को प्राप्त कर सकता हैं जो कि ब्रह्म में विद्यमान है। इस शोध से यह भी प्रमाणित होता है कि एक मानव जो भी अनुसंधान, शोध, नया कार्य, सृजन इत्यादि अपने मस्तिष्क द्वारा करता है वह समस्त ज्ञान ब्रह्म में स्थापित हो जाता है।

https://www.greggbraden.com/

5

In one experiment in the research projects pertaining to the research on searching the smallest particle of matter, one photon was split into two. One part was taken to one room and the other part taken to another room. When one of the parts was activated, there was activation in the other part as well, while there was nothing linking the two particles. This experiment was repeated with increasing distances between the two split parts of photon up to about 400 kilometers. Still when one part was activated the other part also showed response.

This scientific finding is extremely important from the Hindu religion point of view. Especially the process of meditation by the Vedic methodology. This finding is an emphatic proof that when a person gets into silent chant of a mantra with full focus upon the God the process is simultaneously also creating similar activation in the brain or mind of the God. It is amply shown from the mentions in scriptures that when a true devotee is calling the God or trying to contact the God, the God gets to know that that particular devotee is contacting Him.

It is profusely mentioned in ancient Indian scriptures that whatever good or bad deeds a person is performing gets stored. These good or bad deeds determine the future fate of the person. This research finding confirms that this is an ultimate truth.

भौतिक शास्त्र में अति सूक्ष्म अणु की खोज मे किये गये एक शोध में एक फोटोन को दो भागों मे विभाजित किया गया। एक भाग को एक कमरे में तथा दूसरे को अन्य कमरे में बिना किसी परस्पर सम्पर्क साधन के ले जाया गया। जब दोनो में से एक भाग में स्पंदन किया गया तो दूसरे भाग में स्वतः ही स्पंदन होने लगा। इसी शोध में दोनो फोटोन के भागों के बीच दूरी बढ़ाई गई, परन्तु फिर भी वही परिणाम सामने आया। यह दूरी ४०० किमी० तक बढ़ाई गई परन्तु फिर भी जब एक भाग में स्पंदन किया गया, तो दूसरे भाग में स्वतः ही होने लगा।

यह वैज्ञानिक शोध हिन्दु धर्म के दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। विशेषकर ध्यान की क्रिया के सम्बन्ध में जैसे कि वेदों में बताई गई है। यह शोध इस क्रिया का प्रमाण है कि जब कोई साधक भगवान पर मन केन्द्रित कर के मन्त्रोच्चारण द्वारा साधना करता है, तो जैसा स्पन्दन उसके मस्तिष्क में होता है वैसा ही स्पन्दन भगवान के मन में भी अवश्य होता है। जैसा कि हमारे ग्रंथों में बताया गया है कि जब एक साधक पूर्ण निष्ठा से भगवान से सम्बन्ध स्थापित करना चाहता है तो वह सम्बन्ध स्थापित हो जाता है व भगवान को भी ज्ञात हो जाता है कि कौन साधक उन से सम्बन्ध करना चाहता है।

यह भी हमारे ग्रंथों में अनेकों स्थानों पर बताया गया है कि मानव के समस्त अच्छे अथवा बुरे कर्म ब्रह्म में स्थापित हो जाते हैं। यही कर्म व्यक्ति का भविष्य का भाग्य निर्धारित करते हैं। यह शोध इस तथ्य को भी पूर्णतया प्रमाणित करता है।

https://www.greggbraden.com/

IMPORTANT DEDUCTIONS AND IMPLICATIONS FROM THE ABOVE SCIENTIFIC RESEARCH WITH RESPECT TO ANCIENT HINDU SCRIPTURES

उक्त वैज्ञानिक शोधों के आधार पर भारतीय प्राचीन ग्रंथों के निहितार्थ निम्न महत्वपूर्ण निर्णयात्मक तात्पर्य व परिणाम निकाले जा सकते हैं।

1

That the God or Gods are actually existing in real time at the present moment. Gods are not mere history or imagination.

यह कि भगवान व देवताओं का आस्तित्व अवश्य है तथा वे वर्तमान समय में भी आस्तित्व में अवश्य ही हैं। भगवान का होना कोई इतिहास अथवा कोरी कल्पना नहीं है।

2

That we are all connected to the God through the medium of Brahm.

यह कि समस्त जीव जन्तु ब्रह्म के माध्यम से भगवान के सम्पर्क में हर समय रहते ही हैं। 

3

That we are all receiving consciousness through the medium of Brahm because of which we are all alive. The consciousness we are receiving is through the medium of Brahm.

यह कि प्राणी जगत में जो जीव जन्तुओं में चेतना अथवा चेतन शक्ति है वह ब्रह्म के माध्यम से जीव जन्तुओं को प्राप्त हो रही है। इस चेतना शक्ति के कारण ही पृथ्वि पर जीवन है।

4

That God is receiving all the information about our thoughts, feelings and actions through the antenna of our brain through the medium of Brahm. Therefore, God has all the record of all of the sins and good deeds we have committed. Therefore, it is impossible to hide our actions from God.

यह कि भगवान को हर जीव के विषय में समस्त जानकारी जैसे कि जीव की सोच, जीव का अनुभव तथा जीव के कर्म इत्यादि की जानकारी प्राप्त है। इस प्रकार भगवान के पास हर मानव के जीवन के कर्मों का लेखा जोखा अवश्य रहता है। अतः कुछ भी भगवान से छुपा नहीं है।

6

That God can manipulate the activity of our brain at any time He wants. That God can manipulate intelligence of all of the living beings. Just like a television broadcaster can switch off signal to our dish antenna if we have not paid the bill, or change channels according to our option God can manipulate our thoughts and actions.

यह कि भगवान हमारे मस्तिष्क की सोच को प्रभावित करने में सक्षम है। हमारी बुद्धिमता को प्रभावित करने में सक्षम है। हमारी चेतना को प्रभावित करने में सक्षम है। ठीक उस प्रकार जैसे कि एक सैटेलाईट टी०वी० संचालक यदि हमनें भुगतान नहीं किया तो हमारे देखने वाले चैनल बंद कर सकता है। 

7

It has been stated in Shrimad Bhagwad Gita that the surest way to connect with the Gods is through the Vedic process. The Vedic processes include recital of stotras and mantras in the way as specified in the ancient texts. So when we are reciting the particular mantra for the particular God, then we are actually establishing connection with the God.

श्रीमद्भागवद्गीता में भगवान ने कहा है कि भगवान से सम्पर्क स्थापित करने का निश्चित साधन वेदिक क्रियायें हैं। इन वेदिक क्रियाओं में वेद तथा स्तोत्र उच्चारण, मन्त्रोच्चारण, वेदिक अनुष्ठान जिस प्रकार वेदो में क्रियायें बताई गई हैं सम्मिलित हैं। तो जब हम ध्यान की क्रिया द्वारा मंत्रोच्चारण करते हैं तो भगवान से सम्पर्क अवश्य ही स्थापित करते हैं।

8

That whatever research or deep thinking we are doing as part of Karma, that knowledge is getting stored in Brahm. That all the vast ocean of knowledge that has been done in millions of years has been stored in the Brahm. Brahm can be thought of as a cloud which stores all the memory of all the humans. It has been said in ancient Indian scriptures that if we remove the dust of ignorance each one of us humans is capable of getting that knowledge. So if we remove the dust of ignorance through the practice of vedic processes, then we shall be able to access all that knowledge which has been stored in Brahm.

यह कि हम जो कुछ भी व्यवसाय अथवा धर्म के सम्बन्ध में दीर्घ अनुसंधान करते हैं वह समस्त जानकारी ब्रह्म में स्थापित हो जाती है। यह भी प्रमाणित होता है कि लाखों करोड़ों वर्षों में किये गये शोध व चिन्तन ब्रह्म में स्थापित हो चुके हैं व वर्तमान में भी हो रहे हैं। ब्रह्म को उस क्लाउड के समान भी समझा जा सकता है जिस में कि समस्त मानव जाति की समस्त जानकारी व स्मरण शक्ति संग्रहित है। मस्तिष्क पर जमी हुई अज्ञान की धूल हटा कर हर एक मानव उस ज्ञान को प्राप्त कर सकता है जो कि ब्रह्म में अनन्त काल से स्थापित है। तो यदि हम वेदिक क्रियाओं द्वारा उस अज्ञान की धूल को हटा दें तो हम उस ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं जो कि ब्रह्म में स्थापित है।

If the above set of deep knowledge has been proven correct scientifically then hundreds and thousands of knowledge facts that have been stated in our ancient Indian texts are correct and is only truth. We can say with certainty that all the knowledge that has been stated in ancient texts is real and is not a set of imagined stories and are also not symbolic as has been claimed by many authors.

यदि उपलिखित सनातन धर्म के मूल तथ्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित हो चुके हैं तो यह भी प्रमाणित है कि जो कुछ भी हमारे प्राचीन ग्रंथों मे ज्ञान बताया गया है वह सत्य है। हम एक प्रमाणित तौर पर कह सकते हैं कि हमारे प्राचीन ग्रंथों मे दिया गया ज्ञान ही विज्ञान है न कि कुछ एक कहानियां अथवा कुछ प्रतीकात्मक जैसा कि अनेको तथाकथित विशेषज्ञों ने अपनी पुस्तकों में अब तक बताया है।

The above forms the core of Sanatan Dharm principles which have now been proven to be correct by most advanced scientific research carried out in western laboratories in the recent years. Possibly the western researchers would not be aware of the huge implication of these findings upon Hindu religion.

उपलिखित तथ्य सनातन धर्म के मूल तथ्य ही हैं जो कि अत्याधुनिक पाश्चात्य अनुसंधान शोधों द्वारा पिछले कुछ वर्षों प्रमाणित हो चुके हैं। कदाचित पाश्चात्य शोध करताओं को यह संज्ञान नहीं होगा कि उनके यह शोध भारतीय प्राचीन ज्ञान के दृष्टिकोण से कितने अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

If the core principles have been proven correct then

तो यदि मूल तथ्य सत्य हैं तो

As stated by Bhagwan Krishna in Shrimad Bhagwad Gita that this entire existence is working on the principle of Karma is correct.

यदि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भाग्वद्गीता में यह कहा है कि यह समस्त जीव प्रपञ्च कर्म के सिद्धांत पर आधारित है तो यह सत्य ही है।

That as stated by Bhagwan Krishna in Shrimad Bhagwad Gita that the Soul is indestructible and Soul is what that gives life to human physical body is also correct

यदि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भाग्वद्गीता में यह कहा है कि हमारा मूल आस्तित्व हमारी आत्मा है न कि यह शरीर तो यह भी सत्य ही है।

That as stated by Bhagwan Krishna in Shrimad Bhagwad Gita that the Soul leaves the body at the time of death and takes up another physical body is correct

यदि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भाग्वद्गीता में यह कहा है कि मृत्योपरान्त आत्मा पुराना शरीर छोड़ के नया शरीर धारण कर लेती है तो यह सत्य ही है।

If it is stated at the end of Sanskrit Stotras that reciting the particular stotra alone is capable of destroying sins, then it is correct

यदि संस्कृत स्तोत्रों की फलश्रुति में यह लिखा है कि स्तोत्र के उच्चारण करने से पापों का अन्त होता है तो यह सत्य ही है।

That if it is stated at the end of the particular stotra that recital of that stotra will provide divine protection then it will definitely provide the protection

यदि किसी स्तोत्र की फलश्रुति मे यह लिखा है कि स्तोत्र उच्चारण कर्ता को दैवी संरक्षण प्राप्त होगा तो यह सत्य ही है।

That if it is stated that eating Satvik food is definitely superior to eating Rajasik and Tamasik foods then it is correct.

यदि हमारे भारतीय प्राचीन ग्रंथ यह कहते हैं कि मानव के लिये सात्विक भोजन ही सब से उत्तम भोजान है तो यह सत्य ही है।

The above are just a very very few of the facts defined in our ancient Indian texts. Likewise, there are hundreds of thousands of facts which have been stated in ancient Indian texts which if followed can elevate a person to higher levels of consciousness, and is capable of making human life far better. This is the same knowledge which made India a golden sparrow at one time, because of which India became so prosperous and its fame spread to all over the world, this is the same knowledge which made India the spiritual centre of the world, because of this knowledge, students came to India from all over the world. Now the same knowledge is being brought to you by Uma Kailash Foundation.

उपलिखित तथ्य तो मात्र कुछ ही हैं, इसी प्रकार भारतीय प्रचीन ग्रंथों में असीमित लाभकारी ज्ञान उपलब्ध है जो कि मानव जीवन को उच्चतम बनाने मे सक्षम है, जो कि मानव जीवन को सुखी बनाने में सक्षम है। यही वह ज्ञान है जो कि सैकड़ों वर्षों से अज्ञात है, जिस कारण भारत सोने की चिड़िया बना, जिस कारण भारत इतना समृद्ध था कि पूरे विश्व में भारत की ख्याति फैली थी, जिस कारण भारत विश्व का आध्यात्मिक केन्द्र था, जिस कारण समस्त विश्व के ज्ञानी भारत मे ज्ञान ग्रहण करने आते थे। यही ज्ञान अब उमा कैलाश फाउंडेशन आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रही है।

As said above, It has been stated in ancient Indian texts that the only way to contact God is through the process of ‘Dhyan’. But how to go about it. It is also stated that for every such process such as Dhyan, it must be done under the guidance of a Guru. But why under a Guru? There are hundreds of books available in the market, one can just buy these and start meditation or other activities. But No. For example, if one has to become an Engineer, all the Engineering books are available in the market, nobody can become an Engineer by reading books available in the market. He will definitely have to join an institute or organization. Similarly, the knowledge of Sanatan Dharma is very vast. One may not know as to where to start and how to proceed. Only an able Guru can guide in this regard.

इसी प्रकार भारतीय प्राचीन ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि भगवान से सम्पर्क स्थापित करने का एकमात्र साधन ध्यान है। लेकिन यह किस प्रकार किया जाय? इसी कारण ग्रंथों में यह भी बताया गया है कि ध्यान, साधना अथवा अन्य प्रक्रियायें केवल एक सक्षम गुरु के सान्निध्य में सीखनी चाहियें। परन्तु क्युं? बाजा़र में अनेकों पुस्तकें उपलब्ध हैं, कोई भी पुस्तक क्रय कर के ध्यान अथवा साधना कर सकता है। परन्तु नहीं। जिस प्रकार मान लें कि आपको इंजीनियर बनना है, तो समस्त पुस्तके बाजा़र मे उपलब्ध हैं, परन्तु कोई भी शिष्य बाजा़र से पुस्तके क्रय कर के पढ़ के इंजीनियर नहीं बन सकता। उस के लिये उसे एक विद्यालय अथवा संस्था का सदस्य अवश्य ही बनना पड़ेगा। इसी प्रकार भारतीय अधयात्म को सीखने हेतु किसी प्रकार का सुसंयोजित प्रशिक्षण आवश्यक है वह भी यह सुनिश्चित कर के कि संस्था में व्यापक ज्ञान के शिक्षक हैं अथवा नहीं।

In India or rest of the world there has been no organized teaching about Sanatan Dharma since centuries. There has been no organization which has given an overall understanding of our own religion, Hindu Religion or Sanatan Dharma. Since independence in 1947 again there has been no such effort to impart any kind of teaching or training in the practices of Sanatan Dharma to the followers of Sanatan Dharma. Therefore, most Indians have been following their traditions only.

भारत में अथवा सम्पूर्ण विश्व में सैकड़ों वर्षो से सनातन धर्म का ज्ञान पढ़ाने हेतु एक सुनियोजित पाठ्य क्रम कहीं नही विकसित हुआ है। विश्व में ऐसी कोई भी संस्था नहीं है जो कि सनातन धर्म के ग्रंथों में से निकाल कर एक व्यापक ज्ञान जन मानस तक पहुंचाये। भारत के १९४७ में स्वतंत्र होने के पश्चात भी किसी संस्था का यह प्रयास नहीं रहा कि सनातन धर्म का व्यापक ज्ञान व पद्धतियों एक सुनियोजित प्रणालि द्वारा जन मानस तक पहुंचाई जायें। इस कारण अधिकांश वर्तमान हिन्दु समाज ने केवल वही पद्धतियां व धार्मिक संस्कार अपनाये जो कि पीढ़ियों से उनके परिवारों मे चलते आ रहे थे। जो कि वर्तमान में कई सौ वर्षों मे अज्ञानवश विकृत भी हो चुके है।

Because of vast range of voluminous texts of ancient Indian texts, firstly an average person does not have time, secondly he or she does not know which text to begin with and how to start and how to proceed.

क्युंकि भारतीय प्रचीन ग्रंथ सहस्त्रों की संख्या में हैं, एक साधारण जिज्ञासु नहीं जान सकता कि वह कहां से आरम्भ करे तथा किस प्रकार ज्ञान अर्जन की दिशा में अग्रसर हो। वह यह भी नहीं जानता कि क्या एक साधारण मानव ध्यान प्रक्रिया कर सकता है? क्या उसे सफलता मिलेगी? क्या कोई जाति विशेष ही यह प्रक्रिया सम्पन्न कर सकती है? इत्यादि।

No sect or Guru has shown the path as to how knowledge from our ancient scriptures can be used to reduce human problems and sufferings? How the practices of Sanatan Dharm can take a person towards prosperity? How human intelligence can be enhanced to unconceivable levels? How specialized objectives can be achieved? What exactly is the knowledge in our ancient scriptures, etc. Such a wide scope of knowledge is unreachable for a common Hindu today.

किसी भी सनातन धर्म के विशेषज्ञों अथवा संस्था ने इस तथ्य का सटीक निरूपण नहीं किया कि किस प्रकार सनातन धर्म मानव कष्टों व समस्याओं का निवारण करने मे सक्षम है? किस प्रकार सनातन धर्म व्यक्ति को समृद्धि की ओर अग्रसर कर सकता है व उस की प्रक्रिया क्या है? किस प्रकार मानव बुद्धि का असीम विकास किया जा सकता है? किस प्रकार विशेष लक्ष्यों की प्राप्ति सम्भव हो सकती है? भारतीय प्राचीन ग्रंथो मे जो ज्ञान है वह क्या है? इत्यादि। इस प्रकार की सनातन धर्म के विषय मे एक व्यापक समग्र ज्ञान एक साधारण जिज्ञासु के लिये अप्राप्य है।

Therefore, the essence of Sanatan Dharma still eludes the world. The clarity about different aspects and interlinking of different aspects in Sanatan Dharma, for example how life has come about on Earth? How life is propagating on Earth? How the knowledge of astrology can benefit a person? Why is there reincarnation? How Karma is related to reincarnation? What is the relationship between humans, and all of the other life forms? How all the facts in Sanatan Dharma are interdependent? Etc.

इसी कारण सनातन धर्म विश्व के लिये एक अज्ञात क्षेत्र ही है। अनेकों तथ्यों जैसे कि मानव उत्पत्ति, मानव जीवन संचरण किस प्रकार अग्रसर है, उदाहरणतया ज्योतिष शास्त्र किस प्रकार मानव जीवन मे महत्वपूर्ण है? पुनर्जन्म क्युं है व इसकी सटीक प्रक्रिया क्या है? किस प्रकार कर्म का सिद्धांत व पुनर्जन्म सम्बन्धित हैं? कीट, पशु पक्षि जड़ चेतन का कर्म से क्या सम्बंध है? किस प्रकार समस्त सनातन धर्म के तथ्य एक दूसरे पर आश्रित हैं? इत्यादि।

Uma Kailash foundation, having done about forty-three years of study and research of more than 250 ancient Indian texts and scriptures brings to the world for the first time in the contemporary times, the broad understanding of Sanatan Dharma. This understanding will not tell you about the history, or various terminology. This course will bring to you the real life practices which any common person can use to make his life better and better. Not just making life better but a common person can enhance his or her own powers and defeat the problems in life. How one can create better situations in life, how a person can make his own life superior and prosperous in all aspects, that too all based upon real science.

उमा कैलाश संस्था जिस ने लगभग २५० भारतीय प्राचीन ग्रंथों का पिछले ४३ वर्षों से शोध किया है, सर्वप्रथम विश्व के समक्ष सनातन धर्म का एक समग्र प्रस्तुतिकरण कर रहा है। यह प्रस्तुतिकरण न तो इतिहास सम्बंधित है, न ही सनातन धर्म के विभिन्न तत्वों की व्याख्या, अपितु किस प्रकार सनातन धर्म के मूल तत्वों का वास्तविक जीवन में प्रयोग कर के एक साधारण मानव अपना जीवन सुखमय बना सकता है। न केवल सुखमय बना सकता है, अपितु अनेकों शक्तियों को जाग्रत कर के जीवन की समस्त समस्याओं का निस्तारण  कर सकता है। किस प्रकार जीवन में उच्चतर परिस्तिथियां उत्पन्न कर सकता है, किस प्रकार अपना जीवन श्रेष्ठ व समृद्ध बना सकता है। वह सब भी पूर्णतया वैज्ञानिक तर्क व आधार पर।

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It is also a fact that the world is run by Intelligence and not by human bodies. All the institutions all over the world are imparting only skill training. There is no institution in the entire world which is giving a guided methodology to develop your own intelligence. Uma Kailash Foundation shall bring to you a guided methodology to enhance your own intelligence from day 1.

यह भी सत्य है कि सम्पूर्ण विश्व मानव बुद्धिमता से चल रहा है, न कि शरीरों से। विश्व के समस्त शिक्षण संस्थान केवल व केवल किसी भी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करने का ही प्रशिक्षण दे रहे हैं। विश्व का कोई भी संस्थान एक सुनियोजित रूप से मानव बुद्धिमता के विकास का प्रक्षिशण नहीं दे रहा है। उमा कैलाश संस्था यही सुनियोजित ज्ञान आप तक पहले दिन से ही पहुंचायगा।

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As a member you will receive a Diksha packet containing, Guru Chadar, One Japa Mala, Guru Photo, Daily Puja Paddhati, One pair of Janeyu, three Diksha Mantra and one-year membership of monthly Journal of Sanatan Dharma. One-page description of daily Mantra Japa that essentially needs to be done and how it has to be done. This daily Japa shall prepare one to be successful in more advanced practices of Sanatan Dharma. This will also be the first step towards superior intelligence.

In a step by step manner we shall bring to you the deep secret knowledge in our monthly Journal of Sanatan Dharma Practice.

This membership is also open to all irrespective of their caste, religion or nationality.

संस्था की वार्षिक सदस्यता लेने पर आप जो दीक्षा सामग्री प्राप्त करेंगे उस में एक गुरु चादर, एक जाप माला, एक गुरु चित्र, नित्य पूजा पद्धति, जनेउ, तीन दीक्षा मंत्र तथा एक वर्ष के मासिक सनातन धर्म ई पत्रिका की सदस्यता प्राप्त होगी। इसमें किस प्रकार व कितना जाप करना है उस की जानकारी भी मिलेगी। मासिक पत्रिका में नित्य जाप करने के पश्चात क्या क्या कर सकते हैं उसकी समयानुसार समस्त जानकारी मिलती रहेगी। यह नित्य जाप व पद्धतियां शिष्य को अग्रिम साधनाओं के लिये तैयार करेगा। यह साधक के लिये श्रेष्ठतर बुद्धिमता की ओर पहली सीढ़ी का भी काम करेगा।

हमारी मासिक ई पत्रिका एक एक कर के आपके लिये वह गूढ़ व रहस्यमयी ज्ञान भी आपके लिये लायेगी।

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Today what are the religious practices we are following as Hindus? 

On Deepawali we light candles, diwas, burst crackers. A few conduct puja of Mata Lakshmi and Shri Ganesha. Eat and distribute sweets. Exchange gifts and more or less that is it.

On Holi we smear colors on others and make merry. A day before Holika Dahan is done with a few rituals.

On Raksha Bandhan we tie rakhis and wish well to brothers and sisters.

On Dussehra we burn effigies of Ravan, Kumbhakaran and Meghnad and conduct Ramlilas preceding Dussehra.

In our homes we set up a Puja and pray fervently every day and seek boons from the Gods.

Then on a holiday we go for pilgrimages.

When we face problems in life we approach astrologers who might tell you the correct forecast of life but will have no clue about solutions to the problems.

And so on.

All this is very good and shows the eternal faith of Hindu population.

But ancient Hindu Scriptures are thousands in numbers.

Is the above only what these thousands of scriptures tell?

Is the knowledge and wisdom contained in our thousands of scriptures just this, which can be assimilated in a few pages?

ALL HINDUS MUST WAKE UP AND GET TO KNOW THE REAL TREASURES WE ARE UNKNOWINGLY SITTING UPON.

Our research at Uma Kailash Foundation shows that unknowingly we are sitting on a vast treasure of knowledge which can make us not just supreme intelligent but also shower upon us the success, wealth and power that everyone seeks in his or her professional and personal life irrespective of caste and creed.

But where to start and how to proceed?

Uma Kailash Foundation has taken up the task of bringing this huge knowledge to all in a systematic organized step by step manner.

You will have to become a member and start the real practice. From day one we can assure you of results.

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Friends, as the crux of our research of 43 years upon more than 270 ancient Indian scriptures we have arrived upon the conclusion that Sanatan Dharma is a way of correcting a person's intelligence and elevating it.

It is a process of becoming Extra Ordinary from Ordinary.

It is a process of calming down your mind and thereby boosting your thinking power.

It is a process of removing the dust of ignorance from your minds which makes your intelligence full of wisdom and sharper.

It is a process of getting rid of unfounded fears which stop us from achieving great heights in our lives.

There are hundreds of more reasons.

Only starting upon this path will bring huge changes in your life for the better.

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