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UNDERSTANDING SANATAN DHARMA

the path towards superior intelligence

UMA KAILASH FOUNDATION

UMA KAILASH FOUNDATION

HAS BEEN ESTABLISHED TO RE ESTABLISH THE GLORY OF SANATAN DHARMA BY EDUCATING PEOPLE WORLD WIDE ABOUT THE REAL TENETS AND PRACTICES OF SANATAN DHARMA.

THESE PRACTICES ARE POWERFUL ENOUGH TO BRING ABOUT COMPLETE TRANSFORMATION IN THE LIFE OF INDIVIDUALS, SOCIETIES AND THE NATION.

IN THIS QUEST WE ARE STARTING BY OFFERING A

FREE COURSE

ON UNDERSTANDING SANATAN DHARMA

THIS COURSE IS BASED UPON STUDY OF MORE THAN 200 ANCIENT INDIAN TEXTS DURING THE LAST 43 YEARS.

LIST OF TEXTS INCLUDES INTERPRETATIONS OF SHRIMAD BHAGWAT GEETA BY MANY AUTHORS , VEDAS, PURANAS, TANTRA SHASTRAS AND MANY OTHER TEXTS. 

CLICK HERE TO SEE THE LIST OF TEXTS

उमा कैलाश संस्थान का मूल उद्देश्य सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को जन मानस तक पहुंचाना है तथा वास्तविक जीवन मे वे किस प्रकार इस का लाभ उठा कर अपने जीवन को पूर्णतया समृद्ध व शक्तिशाली बना सकते हैं उन शक्तिशाली पद्धतियों को जन मानस तक पहुंचाना है।

यह पद्धतियां इतनी शक्तिशाली हैं कि वे न केवल एक व्यक्ति अपितु पूर्ण समाज व देश को शक्तिशाली व समृद्ध बना सकती हैं।

इस प्रयास मे हम जन मानस को आत्म ज्ञान के विषय पर एक निःशुल्क पाठ्य क्रम द्वारा आरम्भ कर रहे हैं।

यह पाठ्य क्रम लेखक की पिछले ४३ वर्षों मे लगभग २०० प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है। इस क्रम मे हमारे अन्य पाठ्य क्रम भी कुछ समय मे उपलब्ध हो जायेंगे। 

इन प्राचीन भारतीय ग्रंथों मे श्रीमद्भागवद्गीता, वेद, पुराण, तन्त्र शास्त्र इत्यादि कई अनेक ग्रंथ सम्मिलित हैं।

इन ग्रंथो की सूची देखने हेतु यहां क्लिक करें

 

OBJECTIVES OF UMA KAILASH FOUNDATION

उमा कैलाश संस्थान के मूल उद्देश्य

The primary objective of Uma Kailash Foundation is to make people aware of the power of Sanatan Dharma. This we intend to achieve by taking the following steps:

उमा कैलाश संस्थान का मूल उद्देश्य जन मानस को सनातन धर्म की शक्तियों का परिचय देना है। निम्न पगों द्वारा यह हम जन मानस तक पहुंचाने के लिये प्रयत्नशील हैं:

1. To make people understand their own existence on Earth by offering a FREE course in Self Realization or Atma Gyan. Self Realization is basically understanding our own existence and the process and working of this existence. This is very important because unless we understand the system of existence we are all living in, we shall not be able to appreciate and accept the advanced knowledge contained in ancient Indian texts.

१. जन मानस को आत्म ज्ञान हेतु एक निःशुल्क पाठ्य क्रम प्रस्तुत करना जिस के द्वारा वह पृथ्वि पर अपने जीवन को समझ सके। आत्म ज्ञान मूलतः अपने जीवन को समझने की प्रक्रिया है। यह इस कारण महत्वपूर्ण है कि जब तक मानव उस तंत्र को नहीं समझेगा जिसमें कि वह रह रहा है, वह न तो सुखी हो पायेगा न ही भारतीय प्राचीन ग्रंथो मे उपलब्ध ज्ञान को जान पायेगा न उस ज्ञान का महत्व समझ पायेगा।

2. To introduce to the people the advanced practices of Sanatan Dharma. At present we only know that our ancestors and seers of the past used to perform many penances in the past as a result of which they used to acquire enormous powers. These series of courses will introduce people at large as to what those penances were? The courses will tell as to how those penances were performed? To inform people that knowledge about those penances is still available and How just any average person can perform those penances and achieve great powers. Not only to make one materially rich but Spiritually rich by achieving supreme intelligence.

२. जन मानस को सनातन धर्म के बृहत उन्नत ज्ञान से अवगत कराना। वर्तमान में हम यही जानते हैं कि हमारे पूर्वज ॠषि मुनियों ने अनेकों साधनायें व तप किये जिन के कारण वे असीम शक्तियों के स्वामि बने। यह पाठ्य क्रम पाठकों को उन तपस्याओं व साधनाओं से परिचित करायेंगे कि वे तपस्यायें क्या थी, किस प्रकार वह वर्तमान समय मे भी प्रभाव शाली हैं? व किस प्रकार कोई भी साधारण मनुष्य उन साधनाओं को कर सकता है? जन मानस को यह बताना कि उन तपस्याओं का ज्ञान वर्तमान मे भी उपलब्ध है व वर्तमान समय मे भी वह उन साधनाओं को कर के अनेकों शक्तियां प्राप्त कर सकता है। इन शक्तियों से मानव न केवल भोतिक संपन्नता प्राप्त कर सकता है अपितु आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठता प्राप्त कर अपने को असीम बुद्धिमता की ओर ले जा सकता है। यह सब सामान्य पारिवारिक जीवन मे रह कर भी प्राप्त किया जा सकता है।

3. To initiate research into the Stotras, Mantras and Yantras. The effect of these on human intelligence and life of a person. This is also to establish the importance of Sankrit language as the only available medium to enhance all round human intelligence.

३. स्तोत्र, मन्त्र व यन्त्रों मे शोध करना। इनका मानव बुद्धिमता व व्यक्तिगत जीवन मे प्रभाव। यह प्रयास संस्कृत भाषा के महत्व को स्थापित करना है कि किस प्रकार केवल व केवल संस्कृत भाषा द्वारा ही मानव की समग्र बुद्धिमता का विकास किया जा सकता है।

4. Thousands of ancient Indian manuscripts are still available which have not been documented till date. It would be our endeavor to transliterate old handwritten manuscripts and spread the knowledge to the masses.

४. वर्तमान समय तक अनेकों ऐसी हस्तलिखित पाण्डुलिपियां उपलब्ध हैं जिनका पुस्तकी करण नहीं हुआ है। यह हमारा प्रयास रहेगा कि उन पाण्डुलिपियों पर परयाप्त शोध कार्य हो व उन का ज्ञान जन मानस तक पहुंचे।

5. Thousands of formulations in Ayurveda are available for various ailments, which have not been tried and tested till date. It would be our endeavor to initiate research into those formulations, their laboratory and field trials and establishing their efficacy and usage for enormous health benefits to mankind.

५. इसी प्रकार आयुर्वेद मे अनेकों ऐसी औषधियों के विषय मे जानकारी उपलब्ध है जिन के ऊपर शोध कार्य नहीं किये गये हैं। इन शोधों को वास्तविक रूप देना व वर्तमान वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा इन औषधियों पर शोध करना व मानव जीवन पर उनका व्यापक महत्व समझना। इन के द्वारा मानव जीवन को अधिक स्वस्थ बनाना।

6. To initiate Research projects in Yoga for Kundalini Awakening. This process of Kundalini Awakening is only a concept known to mankind till now with no established scientific result oriented research. The founder of UMA KAILASH FOUNDATION has discovered a series of Yogic exercises from the ancient Indian texts which lead to awakening of the Kundalini power. These exercises he has tried upon himself and own family members with astounding results. These Yogic exercises not just infuse enormous amount of physical power in a person but also slow down the ageing process as also completely making the body free of lifestyle diseases such as diabetes, blood pressure and heart diseases, obesity etc. 

६. कुण्डलिनी जाग्रण की योगिक आसनों व प्रक्रियाओं पर शोध कार्य करना। कुण्डलिनी जाग्रण की प्रक्रिया वर्तमान समय तक केवल एक संकल्पना मात्र ही है व इस पर किसी भी संस्थान द्वारा वैज्ञानिक शोध कार्य नहीं किये गये हैं। उमा कैलाश संस्थान के संस्थापक ने प्रचीन भारतीय ग्रंथों से कुछ योग आसनों व क्रियाओं का संकलन किया है जिन के द्वारा कुण्डलिनी जाग्रण संभव है। इन योगासनों व क्रियाओं का अनुलम्बन उन्होने अपने व अपने परिवार के सदस्यों पर किया है जिस मे आश्चर्यचकित करने वाले परिणाम सामने आये हैं। यह कुण्डलिनी जाग्रण की क्रियायें न केवल शरीर मे शक्ति का संचार करती हैं अपितु आयु बढ़ने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाती हैं। यह क्रियायें वर्तमान में चलित अनेकों भयानक रोग जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग व मोटापे जैसे अनेको रोगों से केवल व्यायाम द्वारा छुटकारा दिलाने मे सक्षम हैं।

THIS IS THE VERY FIRST EFFORT OF ITS KIND IN THE WORLD FOR THE PROPAGATION OF SANATAN DHARMA. THEREFORE ALL THE PEOPLE ARE REQUESTED TO JOIN THE COURSE AND JOIN US IN THE EFFORT TO ESTABLISH SANATAN DHARMA AS THE GREATEST WAY OF LIFE KNOWN TO MANKIND AND ALSO HELP THE PEOPLE ACROSS THE WORLD BY MAKING THEIR LIFE BETTER.

हमारा प्रयास विश्व मे सनातन धर्म के प्रचलन हेतु एकमात्र ऐसा प्रयास है। इस कारण समस्त बन्धुजनों से आग्रह है कि वे उपलिखित निःशुल्क पाठ्यक्रम मे भाग लें व सनातन धर्म को पुनः विश्व मे श्रेष्ठतम स्थान प्राप्त कराने मे सहयोग दें। सनातन धर्म जो कि विश्व मे मानव जीवन को सुखमय बनाने का श्रेष्ठतम मार्ग है।